नैनीताल हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद उत्तराखंड में शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया फिलहाल ठप हो गई है। शिक्षा विभाग ने तबादलों पर रोक लगा दी है और अब किसी भी आगे की कार्रवाई से पहले न्याय विभाग से परामर्श ले रहा है। यह फैसला सुगम और दुर्गम कार्यस्थलों के निर्धारण में पारदर्शिता की कमी को लेकर हाईकोर्ट द्वारा उठाए गए सवालों के चलते लिया गया है।
प्रदेश में वर्तमान सत्र के तहत शिक्षकों के तबादलों की प्रक्रिया जारी थी, जिसमें प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक स्थानांतरण होने थे। कुछ विशेष परिस्थितियों में आठ शिक्षकों का स्थानांतरण उच्च अनुमोदन के बाद किया भी गया था, लेकिन अब इन सभी पर भी रोक लगा दी गई है। शिक्षा विभाग को निर्देशित किया गया है कि जब तक न्याय विभाग की राय नहीं मिल जाती, तब तक कोई भी निर्णय न लिया जाए।
हाईकोर्ट ने स्थानांतरण एक्ट के तहत सुगम और दुर्गम कार्यस्थलों के निर्धारण को लेकर असंतोष जताया और इसी बिंदु को आधार बनाकर स्थानांतरण पर रोक लगा दी गई। उल्लेखनीय है कि इस अधिनियम के अनुसार, 10 जून तक स्थानांतरण सूचियां जारी होना अनिवार्य है। फिलहाल विभाग यह तय नहीं कर पाया है कि वह हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध अपील करेगा या फिर आदेश का पालन करेगा।
स्थिति यह है कि पारस्परिक, पारिवारिक या स्वास्थ्य संबंधी विशेष परिस्थितियों में किए गए कुछ स्थानांतरण भी अटके हुए हैं। शिक्षा विभाग की अगली रणनीति न्याय विभाग की सलाह पर निर्भर है। अगर अपील नहीं की गई, तो स्थानांतरण प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि मामले में जल्द ही निर्णय लिया जाएगा, ताकि शिक्षकों की स्थिति स्पष्ट हो सके।
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