देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले बीएसएफ के जवान प्रेम सिंह रावत को आखिरकार तीन दशक बाद वह सम्मान मिला, जिसके वे और उनका परिवार वर्षों से हकदार थे। 1994 में बांग्लादेशी तस्करों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए लांस नायक प्रेम सिंह को अब आधिकारिक रूप से शहीद का दर्जा प्रदान किया गया है। यह सम्मान न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि पूरे गांव और राष्ट्र के लिए एक प्रेरणा है।
हल्द्वानी के ऊंचापुल स्थित आवास पर बीएसएफ अधिकारियों ने शहीद की पत्नी गुड्डी देवी, पुत्र सूर्यप्रताप और भाई धन सिंह को वह सम्मान-पत्र सौंपा, जिसमें प्रेम सिंह रावत के अदम्य साहस और बलिदान की आधिकारिक मान्यता दी गई। इस अवसर पर वीरांगना गुड्डी देवी ने कहा, “हमारी लड़ाई और वर्षों का इंतजार अब सार्थक हो गया।” उनका यह भावुक क्षण पूरे गांव की आंखों को नम कर गया।
शहीद के भाई धन सिंह रावत ने बताया कि जब-जब तिरंगा फहराया जाता था या देशभक्ति के गीत बजते थे, तो उनके मन में एक कसक रहती थी। लेकिन अब जब प्रेम सिंह रावत को राष्ट्र की ओर से सम्मान मिला है, तो वह गर्व से भर उठे हैं। उन्होंने कहा, “अब लगता है जैसे पूरा देश हमारे भाई को याद कर रहा है।
“पिता की शहादत को विरासत मानने वाले पुत्र सूर्यप्रताप रावत ने कहा कि उन्होंने अपने पिता को कभी देखा नहीं, पर हमेशा उनकी वीरगाथाएं सुनते हुए बड़े हुए। अब जब उन्हें शहीद का दर्जा मिला है, तो यह उनके लिए सिर्फ एक प्रमाणपत्र नहीं बल्कि पहचान, प्रेरणा और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “अब जब भी मेरा नाम लिया जाएगा, उसके साथ मेरे शहीद पिता का नाम भी जुड़ा होगा। इससे बड़ा सम्मान मेरे लिए नहीं हो सकता।”
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