देश के कई हिस्सों में एक बार फिर कोरोना संक्रमण के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। इसी कड़ी में उत्तराखंड में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है, हालांकि राज्य में स्थानीय स्तर पर फिलहाल कोई मामला सामने नहीं आया है। लेकिन बाहरी राज्यों से आए दो लोगों में संक्रमण की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एहतियातन कदम तेज कर दिए हैं।
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा ने जानकारी दी कि गुजरात से ऋषिकेश पहुंची 57 वर्षीय महिला में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। महिला को डायबिटीज और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हैं, फिलहाल उनका इलाज एम्स ऋषिकेश में चल रहा है। इसके अलावा एम्स की एक महिला चिकित्सक, जो हाल ही में बेंगलुरु से लौटी हैं, उनमें भी संक्रमण पाया गया है। वह होम आइसोलेशन में हैं और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में हैं।
सैंपलिंग और जीनोम सीक्वेंसिंग बढ़ेगी
राज्य में संक्रमण की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को सैंपलिंग की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही किसी भी नए मरीज में संक्रमण की पुष्टि होने पर उसके सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग कराई जाएगी, जिससे नए वैरिएंट्स की पहचान समय रहते की जा सके। साथ ही ऑक्सीजन, दवाइयों, मेडिकल स्टाफ और उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
लोगों से सतर्कता बरतने की अपील
डॉ. टम्टा ने बताया कि राज्य में अभी तक कोरोना का कोई स्थानीय प्रसार नहीं हुआ है, लेकिन देश के अन्य राज्यों में केस बढ़ने के चलते सतर्कता बरतना जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भीड़-भाड़ से बचें, मास्क पहनें और किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में कोरोना, इन्फ्लूएंजा या SARS जैसे संक्रमणों के मामले एक साथ सामने आते हैं तो वहां तत्काल जांच और रोकथाम की व्यवस्था लागू की जाएगी। विभाग द्वारा ऐसे क्षेत्रों में क्लस्टर आधारित निगरानी और नियंत्रण की रणनीति अपनाई जाएगी।
निष्कर्ष:
राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग सतर्कता की स्थिति में हैं और आमजन से सहयोग की अपेक्षा की जा रही है। समय रहते कदम उठाने से संक्रमण को रोका जा सकता है, इसीलिए सावधानी और सतर्कता ही इस समय सबसे बड़ा उपाय है।
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