देहरादून। पुष्पांजलि इंफ्राटेक के निदेशक दीपक मित्तल, जो कि 45 करोड़ रुपये की ठगी कर फरार हैं, अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। अब खुलासा हुआ है कि पुलिस द्वारा पूर्व में दावा किया गया ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ दरअसल कभी जारी ही नहीं हुआ था। इसकी बजाय इंटरपोल के माध्यम से ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है, जिसका उद्देश्य केवल आरोपी की लोकेशन या ठिकाने का पता लगाना होता है, न कि सीधे गिरफ्तारी कराना।
दुबई में मिला था सुराग, लेकिन बाद में हुआ लापता
वर्ष 2023 के अंत में जब सीबीआई के माध्यम से इंटरपोल को रेड कॉर्नर नोटिस की सिफारिश भेजी गई थी, तब यह जानकारी सामने आई थी कि दीपक और उसकी पत्नी राखी मित्तल दुबई के अलमासा इलाके में रह रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने जब उनका पासपोर्ट रद्द किया, तो उन्होंने इस पते को ही रिकॉर्ड में डलवाया था।
हालांकि, बाद में जांच में यह पता चला कि वह इस पते पर भी मौजूद नहीं हैं, जिसके चलते रेड कॉर्नर नोटिस को ब्लू कॉर्नर में बदलना पड़ा। इससे स्पष्ट है कि इंटरपोल के स्तर पर गिरफ्तारी की कार्रवाई बाधित हो गई।
देहरादून में मित्तल की मौजूदगी की चर्चाएं, लेकिन पुलिस करती रही इनकार
लंबे समय से चर्चा है कि दीपक मित्तल कई बार देहरादून आ चुका है और उसने यहां कई लोगों से मुलाकात भी की है। हालांकि, पुलिस लगातार उसकी दून में उपस्थिति से इनकार करती रही है। रेड कॉर्नर नोटिस के बिना अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार करना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है, और ब्लू कॉर्नर नोटिस के दायरे में मित्तल का भारत आना पूरी तरह से संभव है।
गैंगस्टर एक्ट के बावजूद नहीं हो सकी गिरफ्तारी
दीपक मित्तल पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया था, जिसके बाद पुलिस की कार्रवाई तेज होनी चाहिए थी। परन्तु, इसी दौरान यह भी सामने आया कि मित्तल एक उच्च पुलिस अधिकारी से मुलाकात कर चुका है। आरोप यह भी हैं कि उक्त अधिकारी ने मित्तल की परियोजना में निवेश किया था और उसे बचाने के एवज में अपनी रकम वापस भी ले ली। वहीं, अधिकारी के अधीनस्थ की रकम का क्या हुआ, यह आज भी स्पष्ट नहीं है।
दूसरे देश की नागरिकता और पासपोर्ट की आशंका
चूंकि मित्तल का भारतीय पासपोर्ट रद्द किया जा चुका है, ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि उसने किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त कर ली हो और फर्जी नाम पर पासपोर्ट बनवाकर भारत में प्रवेश किया हो। नेपाल के रास्ते सड़क मार्ग से उत्तराखंड में घुसपैठ की संभावना पर भी जोर दिया जा रहा है।
पुष्पांजलि इंफ्राटेक केस: अब तक का घटनाक्रम
दीपक मित्तल और उसकी पत्नी 2020 से फरार हैं।
2018 से निर्माण कार्य ठप है और करीब 45 करोड़ रुपये निवेशकों के फंसे हैं।
मित्तल पर 9 मुकदमे दर्ज हैं और 64 से अधिक शिकायतें रेरा में दर्ज हैं।
एमिनेंट हाइट्स व आर्किड पार्क (फेज-1 और 2) के करीब 90 खरीदार अब भी फ्लैट के लिए भटक रहे हैं।
पीएनबी की इंदिरा नगर शाखा से लिया गया 21 करोड़ रुपये का ऋण एनपीए घोषित हो चुका है।
ईडी ने मार्च 2022 में संपत्तियां अटैच कर दी थीं।
खरीदारों ने एनसीएलटी का रुख किया है, जहां से परियोजना को किसी अन्य बिल्डर द्वारा पूर्ण करने की प्रक्रिया जारी है।
रेड और ब्लू कॉर्नर नोटिस में अंतर क्या है?
रेड कॉर्नर नोटिस किसी भगोड़े अपराधी की अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी के लिए होता है, लेकिन इसके लिए आरोपी की सटीक लोकेशन या कॉर्डिनेट्स की जानकारी आवश्यक होती है। वहीं ब्लू कॉर्नर नोटिस केवल उस व्यक्ति के ठिकाने की जानकारी जुटाने के लिए होता है और इसमें गिरफ्तारी उतनी आसान नहीं होती।





