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रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना: 2600 से अधिक निर्माणों को नगर निगम के नोटिस, दस्तावेज और आपत्तियों की मांग शुरू

On: May 22, 2025 7:51 AM
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देहरादून। शहर की प्रमुख परिवहन परियोजनाओं में शामिल रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड के लिए नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। परियोजना की सीमा में आने वाले 2600 से अधिक घरों और अन्य निर्माणों को चिह्नित करने के बाद अब नगर निगम ने संबंधित निर्माण स्वामियों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

नगर निगम ने इन निर्माण स्वामियों से आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है, साथ ही उन्हें अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर भी दिया जा रहा है। दस्तावेजों की जांच और आपत्तियों के निस्तारण के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

नगर निगम की कार्रवाई संयुक्त सर्वेक्षण के बाद शुरू हुई है, जिसमें दोनों नदियों—रिस्पना और बिंदाल—के किनारे बने निर्माणों की स्थिति का विश्लेषण किया गया। चिन्हित निर्माणों को लाल निशान लगाकर सीमांकित किया गया है।

6252 करोड़ की लागत से बनेगा 26 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर
इस मेगा प्रोजेक्ट के अंतर्गत रिस्पना नदी पर 11 किलोमीटर और बिंदाल नदी पर 15 किलोमीटर लंबा चार लेन एलिवेटेड रोड प्रस्तावित है। कुल 26 किलोमीटर की इस परियोजना के लिए 6252 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

परियोजना के निर्माण के दौरान बिजली की हाई टेंशन लाइनों, सीवर लाइनों और अन्य आवश्यक ढांचों को भी शिफ्ट किया जाएगा।

प्रभावित संपत्तियों की विस्तृत जानकारी
रिस्पना एलिवेटेड रोड के लिए कुल 44.82 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होगी, जिसमें 42.64 हेक्टेयर सरकारी और 2.17 हेक्टेयर निजी भूमि शामिल है। यहां 771 स्थायी और 349 अस्थायी संरचनाएं प्रभावित होंगी, जिससे कुल 1120 लोग प्रभावित होंगे।

वहीं, बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना के अंतर्गत 43.91 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है, जिसमें 25.79 हेक्टेयर सरकारी, 18.11 हेक्टेयर निजी, 1.96 हेक्टेयर वन भूमि, 4.00 हेक्टेयर सीए भूमि, 4.93 हेक्टेयर रक्षा संपत्ति और 0.42 हेक्टेयर पियर फाउंडेशन के लिए आवश्यक भूमि शामिल है। यहां 934 स्थायी और 560 अस्थायी संरचनाएं प्रभावित होंगी, जिससे कुल 1494 निर्माणों पर असर पड़ेगा।

नगर निगम की स्पष्ट चेतावनी
नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त वीपीएस चौहान ने बताया कि संबंधित लोगों को जो नोटिस भेजे जा रहे हैं, उनमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि केवल हाउस टैक्स की रसीद को संपत्ति के स्वामित्व का प्रमाण नहीं माना जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि दस्तावेजों के सत्यापन और प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण के बाद आगे की कार्रवाई उच्चाधिकारियों के निर्देश पर की जाएगी। फिलहाल आपत्तियों की सुनवाई की तिथि तय नहीं की गई है।

यह परियोजना न केवल देहरादून की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने में सहायक होगी, बल्कि शहर के नदी तटों पर अवैध निर्माणों को हटाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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