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उत्तराखंड में जुलाई 2025 में होंगे पंचायत चुनाव, ओबीसी आरक्षण निर्धारण इस माह संभावित

On: May 18, 2025 6:40 AM
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देहरादून। उत्तराखंड के 12 जिलों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव जुलाई 2025 में कराए जाएंगे। हरिद्वार को छोड़कर राज्य के बाकी जिलों में चुनाव को लेकर अब तस्वीर स्पष्ट हो गई है। सरकार ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल करते हुए चुनाव जुलाई में संपन्न कराने की बात कही है। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर चुनावी तैयारियों में तेजी आ गई है।

सरकार ने पंचायतों में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण को लेकर पंचायतीराज अधिनियम में संशोधन करते हुए एक अध्यादेश लाया, जिसे राजभवन की स्वीकृति मिल गई है। पंचायतीराज सचिव चंद्रेश कुमार यादव ने जानकारी दी है कि ओबीसी आरक्षण की अंतिम अधिसूचना इसी माह जारी कर दी जाएगी, और इसके बाद यह सूचना राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी।

हरिद्वार में नहीं होंगे चुनाव, बाकी जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारी प्रशासकों के पास

गौरतलब है कि हरिद्वार जिले में पंचायत चुनाव उत्तर प्रदेश के साथ कराए जाते हैं। वहां पिछली बार चुनाव वर्ष 2022 में हुए थे। जबकि राज्य के अन्य 12 जिलों में पंचायतों का कार्यकाल नवंबर 2024 में पूरा हो गया था। समय पर चुनाव न हो पाने के कारण पंचायतों की जिम्मेदारी प्रशासकों को सौंपी गई थी। सरकार ने तब से लेकर अब तक परिसीमन, मतदान क्षेत्रों के निर्धारण और मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसे अहम कार्य पूरे कर लिए हैं।

ओबीसी आरक्षण पर नई व्यवस्था लागू

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार पंचायतों में ओबीसी आरक्षण का निर्धारण एक विशेष आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा। आयोग की सिफारिशों के अनुसार अब ओबीसी आरक्षण की पुरानी 14% सीमा हटा दी गई है, लेकिन आरक्षण की कुल सीमा अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और ओबीसी को मिलाकर 50% से अधिक नहीं हो सकेगी। जिन क्षेत्रों में SC-ST की जनसंख्या पहले से ही 50% से अधिक है, वहां ओबीसी को आरक्षण नहीं मिलेगा।

जिला पंचायत सदस्यों के लिए आरक्षण का निर्धारण शासन स्तर पर होगा, जबकि क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत के लिए यह कार्य जिला स्तर पर किया जाएगा।

प्रशासकों का कार्यकाल अधिसूचना पर टिका

प्रशासकों का मौजूदा कार्यकाल 27 मई और 31 मई को समाप्त हो रहा है। यदि पंचायत चुनाव की अधिसूचना समय रहते जारी कर दी जाती है तो प्रशासकों का कार्यकाल स्वतः समाप्त हो जाएगा और नई पंचायतें कार्यभार संभाल लेंगी। लेकिन अधिसूचना में देरी होने पर सरकार को प्रशासकों का कार्यकाल बढ़ाने के लिए पंचायतीराज अधिनियम में एक और संशोधन अध्यादेश लाना पड़ सकता है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि पंचायत चुनाव समय पर संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। जैसे ही ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होगी, पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।

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