अब प्रदेश में प्रवेश करने वाले निजी और व्यावसायिक दोनों प्रकार के वाहनों को अधिक शुल्क देना होगा। यह फैसला राज्य मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि उत्तराखंड में पंजीकृत वाहनों पर यह सेस लागू नहीं होगा। खास बात यह है कि इलेक्ट्रिक और दोपहिया वाहनों को इस नियम से छूट दी गई है।
वर्ष 2021 में चेकपोस्ट बंद हो जाने के कारण बाहरी राज्यों के निजी वाहनों से ग्रीन सेस वसूलना संभव नहीं हो पा रहा था। अब सरकार ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे के जरिए फास्टैग खातों से सीधे ग्रीन सेस वसूलने की व्यवस्था की है। इसके लिए सिस्टम इंटीग्रेटर का चयन कर लिया गया है और जल्द ही इसे नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और वाहन सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत वाहनों की श्रेणियों के अनुसार ग्रीन सेस की दरें तय की गई हैं। भारी वाहनों के लिए यह दर 450 से 700 रुपये तक, जबकि हल्के माल वाहनों और डिलीवरी वैन के लिए यह 80 से 250 रुपये के बीच रखी गई है। मोटर कैब, मैक्सी कैब और सामान्य पैसेंजर कारों को भी 80 रुपये तक का सेस देना होगा। बसों के लिए यह राशि 140 रुपये तय की गई है।
यह फैसला न केवल उत्तराखंड के पर्यावरण को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इससे राज्य सरकार को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। यह कदम पर्यटन सीजन में राज्य में बढ़ते वाहन दबाव को नियंत्रित करने और प्रदूषण पर काबू पाने के उद्देश्य से भी लिया गया है। 15 जून से नई दरों के तहत वसूली शुरू कर दी जाएगी।
यह भी पढ़ें : सड़क पर सनकी की गोलीबारी से मचा हड़कंप, कारों में तोड़फोड़, लोगों में दहशत






