देहरादून। उत्तराखंड ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बेहतर नीति-निर्माण, पारदर्शी प्रशासन और वित्तीय अनुशासन के दम पर किसी भी राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। प्रतिष्ठित बिजनेस समाचार पोर्टल फाइनेंशियल एक्सप्रेस की ताजा रैंकिंग में उत्तराखंड ने देश के छोटे राज्यों में वित्तीय स्थिति के मामले में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। यह गौरवपूर्ण स्थान गोवा के ठीक बाद है, जो राज्य की आर्थिक मजबूती और सुशासन का सशक्त प्रमाण है।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड ने न केवल अपने राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण रखा है, बल्कि स्वयं के कर राजस्व में भी महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की है। साथ ही बकाया ऋण प्रबंधन और सरकारी गारंटी के संचालन में भी राज्य का प्रदर्शन प्रशंसनीय रहा है। वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ राज्य ने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता देकर समग्र विकास का संतुलन बनाए रखा है।
प्रशासनिक दक्षता में भी उत्तराखंड ने बढ़ाई साख
वित्तीय प्रबंधन के साथ ही उत्तराखंड ने शासन व्यवस्था में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य सरकार ने व्यवसायिक वातावरण को सरल और अनुकूल बनाने, न्यायिक प्रक्रियाओं को तेज करने और डिजिटल सेवाओं को व्यापक रूप से सुलभ बनाने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए हैं। इन प्रयासों ने उत्तराखंड को प्रशासनिक दक्षता के मामले में भी अग्रणी राज्यों की सूची में खड़ा कर दिया है।
मुख्यमंत्री धामी ने जताया गर्व, बताए भविष्य के लक्ष्य
इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “यह उपलब्धि उत्तराखंड के हर नागरिक की मेहनत, हमारी सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन का परिणाम है। हमने वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता दी और शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल सेवाओं तथा न्याय व्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में निरंतर कार्य किया।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सरकार का अगला फोकस डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने, पर्यटन को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने पर रहेगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि ‘डबल इंजन सरकार’ की सोच के अनुरूप उत्तराखंड को देश का सबसे प्रगतिशील और समावेशी राज्य बनाने का लक्ष्य है।
नवीन भारत के निर्माण में उत्तराखंड की भूमिका सशक्त
उत्तराखंड की यह उपलब्धि न केवल राज्यवासियों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह पूरे देश के लिए एक प्रेरणा भी है कि कैसे छोटे राज्य भी सशक्त नेतृत्व और दूरदर्शी नीतियों के माध्यम से राष्ट्रीय विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। यह उपलब्धि राज्य को आत्मनिर्भरता और समृद्धि की ओर एक और कदम आगे बढ़ाती है।
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