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बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले, सीएम धामी ने किए दर्शन

On: May 4, 2025 3:58 AM
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बदरीनाथ। उत्तराखंड के चारधामों में प्रमुख श्री बदरीनाथ धाम के कपाट रविवार सुबह छह बजे श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विधिवत रूप से खोल दिए गए। छह महीने की शीतकालीन बंदी के बाद जैसे ही कपाट खुले, पूरे बदरीनाथ धाम परिसर में ‘जय बद्री विशाल’ के जयकारों की गूंज सुनाई दी। कपाट खुलने की शुभ वेला पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी भगवान बद्री विशाल के दर्शन किए और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की।

देवभारा यात्रा के साथ धाम पहुंचे उद्धव जी, कुबेर जी और शंकराचार्य जी की गद्दी

शनिवार को पांडुकेश्वर स्थित योगध्यान बद्री मंदिर से देवभारा यात्रा रवाना हुई थी, जो मुख्य देवता उद्धव जी, खजांची कुबेर जी, गरुड़ उत्सव डोली और आदि शंकराचार्य जी की गद्दी के साथ बदरीनाथ धाम पहुंची। रावल अमरनाथ नंबूदरी की अगुवाई में सैकड़ों श्रद्धालु इस पावन यात्रा का हिस्सा बने।

हनुमान चट्टी और लीलाढुंगी में हुई विशेष पूजा

देवभारा यात्रा के मार्ग में रावल अमरनाथ नंबूदरी ने हनुमान चट्टी में भगवान हनुमान की पूजा की। इसके पश्चात बामणी गांव के समीप स्थित लीलाढुंगी, जो भगवान नारायण की जन्मस्थली मानी जाती है, वहां पुरातन विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न कर यात्रा बदरीनाथ मंदिर के सिंहद्वार तक पहुंची।

कपाट खुलने की परंपरा निभाई गई, विशेष पूजा के साथ हुआ शुभारंभ

रविवार प्रातः चार बजे से कपाट खोलने की विधियां शुरू हुईं। मंदिर समिति के अधिकारी-कर्मचारी, वेदपाठी, हक-हकूकधारी, धर्माधिकारी तथा रावल मंदिर परिक्रमा में एकत्र हुए। साढ़े चार बजे दक्षिण द्वार से श्री कुबेर जी को मंदिर परिसर में लाया गया। पांच बजे अन्य गणमान्य अतिथि पहुंचे, और साढ़े पांच बजे द्वार पूजन प्रारंभ हुआ। ठीक छह बजे भगवान बद्री विशाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।

श्रद्धालुओं को मिला घृत कंबल का दिव्य प्रसाद

कपाट खुलते ही भगवान को शीतकाल में ओढ़ाई गई घृत (घी) से बनी कंबल को प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसे विशेष पुण्यफलदायक माना जाता है। इसके बाद भगवान का स्वर्णाभूषणों से श्रृंगार किया गया।

गढ़वाल स्काउट के बैंड से गूंज उठा मंदिर परिसर

गढ़वाल स्काउट्स के बैंड द्वारा ‘जय बदरी, जय केदार’ की मधुर धुनों ने पूरे धाम को भक्तिरस में डुबो दिया। श्रद्धालुओं ने सिंहद्वार पर माथा टेकते हुए देवभारा यात्रा का भव्य स्वागत किया। मंदिर परिसर ‘नारायण-नारायण’ के उद्घोष से गुंजायमान हो गया।

देवताओं की विधिपूर्वक स्थापना

कपाट खुलते ही रावल जी ने गर्भगृह में प्रवेश कर भगवान नारायण के साथ शीतकाल में निवास कर रही महालक्ष्मी जी की प्रतिष्ठा की। इसके बाद उद्धव जी एवं कुबेर जी को भी बदरीश पंचायत में उनके यथास्थान पर विराजित किया गया। इस प्रक्रिया के साथ ही वर्ष की प्रथम पूजा—अभिषेक एवं महाभिषेक—का आरंभ हुआ।

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