बिहार।
बिहार की राजनीति के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले और करीब दो दशकों तक सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार ने एक ऐसी घोषणा की है, जिसने राजनीतिक पंडितों को भी हैरान कर दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अब बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोड़ेंगे और आगामी राज्यसभा चुनाव 2026 (Rajya Sabha Elections 2026) के जरिए संसद के ऊपरी सदन में जाएंगे। उनके इस फैसले के साथ ही बिहार में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है।
सोशल मीडिया पर साझा की भावुक पोस्ट
नीतीश कुमार ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (X) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर अपनी इस मंशा को जगजाहिर किया। उन्होंने लिखा कि पिछले दो दशकों से अधिक समय से बिहार की जनता ने उन पर जो अटूट विश्वास और समर्थन बनाए रखा, उसी के दम पर उन्होंने प्रदेश की सेवा की। उन्होंने बिहार के विकास और सम्मान के नए आयामों का श्रेय जनता की शक्ति को दिया।
मन में थी एक अधूरी इच्छा
नीतीश कुमार ने अपनी पोस्ट में अपने संसदीय जीवन के एक व्यक्तिगत सपने का जिक्र करते हुए लिखा:
“संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) के साथ-साथ संसद के भी दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) का सदस्य बनूं।”
बता दें कि नीतीश कुमार लोकसभा और बिहार के दोनों सदनों के सदस्य रह चुके हैं, लेकिन राज्यसभा का सदस्य बनना उनके संसदीय सफर का अंतिम पड़ाव था, जिसे वह अब पूरा करने जा रहे हैं।
बिहार में अब नई सरकार: कौन होगा उत्तराधिकारी?
नीतीश कुमार के इस एलान का सबसे बड़ा असर बिहार की सत्ता पर पड़ने वाला है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में अब नई सरकार बनेगी। हालांकि, उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के नाम का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उन्होंने यह आश्वासन दिया है कि आने वाली नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा।
इस घोषणा के बाद पटना से लेकर दिल्ली तक बैठकों का दौर शुरू हो गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि गठबंधन के भीतर किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री की कमान सौंपी जा सकती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
विकास और विश्वास का सफर
नीतीश कुमार ने अपने संदेश में दोहराया कि बिहार को एक ‘विकसित राज्य’ बनाने का उनका संकल्प पहले जैसा ही मजबूत है। उन्होंने जनता को विश्वास दिलाया कि भले ही उनकी भूमिका बदल रही है, लेकिन बिहार के लोगों के साथ उनका संबंध और प्रदेश के विकास के प्रति उनकी निष्ठा हमेशा कायम रहेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना बिहार की राजनीति में एक बड़े शक्ति-परिवर्तन (Power Shift) का संकेत है। पिछले 20 वर्षों से बिहार की राजनीति नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूमती रही है। उनके हटने से न केवल जेडीयू (JDU) बल्कि एनडीए गठबंधन के भीतर भी नए समीकरण बनेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके जाने के बाद बिहार की कमान किसके हाथों में जाती है और आगामी विधानसभा चुनावों पर इसका क्या असर पड़ता है।
बिहार की जनता के नाम संदेश
मुख्यमंत्री ने अंत में बिहार की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह भविष्य में भी बिहार की सेवा के लिए तत्पर रहेंगे। उनके इस फैसले को उनके लंबे और बेदाग संसदीय करियर के ‘पूर्ण विराम’ के तौर पर देखा जा रहा है, जहाँ वह चारों सदनों का अनुभव रखने वाले गिने-चुने नेताओं की फेहरिस्त में शामिल हो जाएंगे।
यह भी पढ़ें- नागपुर में रूह कंपा देने वाली वारदात: पोते ने डाला होली का रंग, तो दादी ने खौलते पानी से मासूम को जलाया







