उत्तराखंड सरकार ने सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर लगने वाली भीड़ और राशन वितरण में होने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए एक नई योजना शुरू की है। इस योजना के तहत राज्य में “ग्रीन ग्रेन एटीएम” लगाए गए हैं, जो आधुनिक तकनीक से लैस हैं और उपभोक्ताओं को तेजी से अनाज उपलब्ध कराएंगे। इस नई व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं को अब लंबी लाइनों में लगने की जरूरत नहीं होगी, और साथ ही घटतौली की समस्या भी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

चार स्थानों पर लगाए गए ग्रीन ग्रेन एटीएम

जिला पूर्ति कार्यालय ने राज्य में चार ग्रीन ग्रेन एटीएम स्थापित किए हैं, जो देहरादून, ऋषिकेश, सहसपुर और विकासनगर में लगाए गए हैं। इन एटीएम का ट्रायल पूरा हो चुका है और अब इन्हें आधिकारिक रूप से संचालित किया जाएगा। यह एटीएम एक दिन में 30 क्विंटल तक गेहूं और चावल का वितरण करने की क्षमता रखते हैं।

कैसे काम करता है ग्रीन ग्रेन एटीएम?

ग्रीन ग्रेन एटीएम पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड प्रणाली पर आधारित है। इसमें राशन कार्ड का नंबर दर्ज करते ही उपभोक्ता की पूरी जानकारी उपलब्ध हो जाती है। इस मशीन के जरिए राशन वितरण की प्रक्रिया को बेहद आसान और पारदर्शी बनाया गया है।

  1. राशन कार्ड की स्कैनिंग – उपभोक्ता को अपने राशन कार्ड का नंबर दर्ज करना होगा, जिससे उसकी सभी डिटेल्स स्क्रीन पर आ जाएंगी।
  2. योजना की जानकारी – एटीएम में यह सुविधा दी गई है कि अंत्योदय, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के तहत कितना राशन उपलब्ध है।
  3. यूनिट दर्ज करने पर अनाज निकलेगा – उपभोक्ता को अपनी पात्र यूनिट दर्ज करनी होगी, जिसके अनुसार अनाज निकल जाएगा।
  4. स्वचालित वजन प्रणाली – मशीन द्वारा अनाज का सटीक वजन किया जाएगा, जिससे घटतौली की कोई शिकायत नहीं रहेगी।
  5. तेजी से वितरण – पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को लाइन में लगकर इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

राशन विक्रेताओं को दिया गया प्रशिक्षण

जिला पूर्ति कार्यालय ने ग्रीन ग्रेन एटीएम के संचालन को सुचारू बनाने के लिए राशन विक्रेताओं को विशेष प्रशिक्षण भी दिया है। इस प्रशिक्षण में एटीएम के सही इस्तेमाल, तकनीकी समस्याओं को समझने और उपभोक्ताओं की सहायता करने की जानकारी दी गई।

विभाग करेगा ग्रीन ग्रेन एटीएम की मॉनिटरिंग

इस नई प्रणाली की निगरानी भी सरकार द्वारा की जाएगी। यदि एटीएम में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या आती है, तो उसे ठीक करवाने की जिम्मेदारी जिला पूर्ति विभाग की होगी।

  • राशन विक्रेताओं को एटीएम के संचालन में आने वाले बिजली बिल का भुगतान करना होगा।
  • हर महीने वितरित किए गए राशन की पूरी रिपोर्ट जिला पूर्ति कार्यालय को देनी होगी।
  • ग्रीन ग्रेन एटीएम संचालित करने वाले विक्रेताओं को अन्य दुकानों की तुलना में अधिक लाभांश मिलेगा।

कैसे बदलेगा यह कदम राशन वितरण प्रणाली?

उत्तराखंड में यह नई पहल डिजिटल और पारदर्शी राशन वितरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, बल्कि राशन वितरण प्रणाली भी अधिक कुशल और भ्रष्टाचार मुक्त बनेगी। आने वाले समय में इस योजना को और अधिक जिलों में लागू करने की संभावना है, जिससे अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।

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