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Mahadev : जानिए क्या होता है निशित काल, जिस दैरान पूजा करने से महादेव होते है प्रशन्न।

Mahadev : जानिए क्या होता है निशित काल, जिस दैरान पूजा करने से महादेव होते है प्रशन्न।

देवों के देव महादेव (Mahadev) को भोले इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि भगवान शिव सच में भोले और सरल स्वभाव के हैं। यदि भगवान शिव को कोई खुश कर दे तो वह उसकी मनोकामना पूर्ण करने में देरी नहीं करते हैं। और  कुछ ऐसे समय वह चीजें होती हैं जो भगवान शिव को काफी पसंद होती है और यदि उस समय के दौरान उनकी पूजा की जाए तो फल और भी जल्दी मिलते हैं और ऐसा ही समय है निशित काल।आज कितने बजे से है निशित काल जानने के लिए पूरी खबर पढ़ें।

क्या होता है निशित काल।

महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2021)  का त्यौहार हर फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव के भक्त रात भर जागरण करते हैं।चारों पहर उनकी पूजा करते हैं लेकिन चारों पहर में एक पैर ऐसा होता है। जिसे निशित काल कहते हैं और जो भगवान शिव की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

क्या है निशित काल की कहानी।

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 हिंदू धर्म में पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रात्रि के एक कलपीत पुत्र का नाम निशित है। निशित का अर्थ तीक्ष्ण रात्रि होता है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार जब भगवान शिव पृथ्वी पर लिंग के रूप में अवतरित हुए थे तो वे निशित काल में ही पृथ्वी पर आए थे। और आपने सुना होगा की शिवरात्रि के दिन लिंगोद्भव पूजा का अनुष्ठान भी रात्रि में निशित काल के दौरान ही किया जाता है। आपको बता दें कि महाशिवरात्रि का दिन भगवान शिव के विवाह का दिन है इसीलिए इस दिन रात में चारों पहर जागकर भगवान शिव की पूजा की जाती है और इनमें निशित काल सबसे सर्वश्रेष्ठ काल माना गया है भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए।

यह भी पढ़ें- एक्शन में सीएम तीरथ सिंह रावत,पहले फैसले में ही भोले के श्रद्धालुओं को दिया तोहफा।

सुबह नही आज दिन से है शिवरात्रि का मुहूर्त।

आपको बता दें कि आज शिवरात्रि का मुहूर्त आज दोपहर 2:39 से लेकर 12 मार्च दोपहर 3 बजकर 2 मिनट तक है।

कितने बजे होगा निशित काल।

आपको बता दें कि इस साल की महाशिवरात्रि (Mahashivratri) में काल 11 मार्च रात्रि 12 बजकर 6 मिनिट से प्रारंभ होगा और 12 बजकर 55 मिनट तक चलेगा। इसलिए यदि आप भी भगवान शिव (Mahadev) को खुश करना चाह रहे हैं और चाहते हैं कि भगवान से आपकी पूजा से प्रसन्न हो तो निशित काल में भगवान शिव की आराधना जरूर करें।

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