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जीवन में भूल कर भी नहीं करने चाहिए ये पांच काम


जीवन में भूल कर भी नहीं करने चाहिए ये पांच काम

बदनामी का दाग कोई भी व्यक्ति अपने दामन में भूल कर भी नहीं लगाना चाहता है। क्योंकि यह एक ऐसा दाग होता है जो व्यक्ति के मरने के बाद भी नहीं मिलता है। इसलिए व्यक्ति को सदैव जीवन में ऐसे कार्य करने का प्रयास करना चाहिए जिससे उसे बदनामी  का सामना न  करना पड़े 

 आचार्य चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति दूसरों को  बदनाम करता है वह  व्यक्ति समाज में सम्मान खो देता है. वह एक तरह से समाज में अलग-थलग पड़ जाता है. बदनामी व्यक्ति के लिए एक रोग के समान है जो लगने के बाद व्यक्ति को धीरे-धीरे नष्ट करने लगता है. इसलिए जीवन में ये कार्य कभी नहीं करने चाहिए-

धोखा नहीं देना चाहिए

धोखा देने वाला व्यक्ति अपयश का भागी होता है. ऐसे व्यक्ति कभी भी सम्मान की दृष्ठि से नहीं देखे जाते हैं. जब इनकी पोल खुलती है तो इनकी बदनामी इन्हें कहीं भी खड़ा नहीं होने देती है. इसलिए कभी भी किसी को धोखा नहीं देना चाहिए

चुगली करना बुरी आदत है

चुगली करना एक बुरी आदत है. इससे सैदव ही बचना चाहिए. जो लोग ऐसा करते हैं उनका मानसिक स्तर बहुत ही निम्न स्तर का होता है. ऐसे लोगों पर भरोसा करने से आपसी संबंधों में दरार आती है. लेकिन जब व्यक्ति को सच्चाई का अभास होता है तो चुगली करने वालों को दुत्कार मिलती है. ऐसे लोगों की हर कोई बदनामी करता है.

झूठ का न लें सहारा

अर्थ प्रधान समाज में हर व्यक्ति तरक्की करना चाहता है. लेकिन कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो तरक्की करने के लिए झूठ का सहारा लेते हैं. ऐसे लोग कुछ समय के लिए सफल हो भी जाते हैं लेकिन जब उनका झूठ खुलता है तो ऐसे लोगों को कोई भी पसंद नहीं करता है. इसलिए अपने लाभ के लिए कभी भी झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए, न ही झूठ बोलने वालों को वरियता देनी चाहिए.

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लालच नहीं करना चाहिए

लालच एक ऐसा रोग है जिसको ये लग जाता है उसका मान सम्मान सबकुछ चला जाता है. यहां तक की उसके अपने भी उसे त्याग देते हैं. लालच जहां होता है वहां सुख शांति का नाश होता है. कलह का वातावरण बना रहता है. क्योंकि लालच करने वाला व्यक्ति स्वयं मानसिक तनावों से जुझता रहता है. ऐसे व्यक्ति कुंठित हो जाते हैं और एक समय ऐसा आता है जब सबकुछ खो जाता है.

बुराई से बचना चाहिए

बुराई करना और सुनना दोनो बराबर है. इसलिए इससे दूर ही रहना श्रेयष्कर है. बुराई एक रस के समान है जिसकी लत लगने के बाद व्यक्ति को उसमें आनंद आने लगता है. निंदारस में डूब जाने से व्यक्ति का सबकुछ नष्ट होने लगता है. लोग उससे दूर बनाने लगते हैं. समाज में ऐसे लोगों को अलग दृष्टि से देखा जाने लगता है.

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