उत्तराखंड में आध्यात्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने 2025-26 के बजट में आध्यात्मिक पर्यटन को सशक्त करने पर विशेष जोर दिया है। इन योजनाओं में हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, अर्द्धकुंभ, कांवड़ मेला, शारदा कॉरिडोर और मानसखंड मंदिर माला मिशन जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के तहत धार्मिक स्थलों के विकास और आध्यात्मिक पर्यटन को पूरे वर्ष सक्रिय बनाए रखने की योजना बनाई गई है, जिससे राज्य में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

चारधाम यात्रा के अलावा पूरे वर्ष धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

चारधाम यात्रा उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है, लेकिन यह यात्रा पूरे वर्ष नहीं चलती। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार शीतकालीन धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। इसके तहत हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर को सशक्त किया जाएगा, जिससे गंगा किनारे बसे धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को विकसित कर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान की जा सकें।

प्रधानमंत्री मोदी के सुझाव से आध्यात्मिक पर्यटन को नया स्वरूप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उत्तराखंड में आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया था, जिसे राज्य सरकार ने अपने नए बजट में लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत को सुव्यवस्थित ढंग से विकसित करने के लिए उन स्थलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। इससे तीर्थाटन को बढ़ावा मिलेगा और राज्य की आर्थिकी को मजबूती मिलेगी।

मानसखंड मंदिर माला मिशन और शारदा कॉरिडोर को वित्तीय सहायता

राज्य सरकार ने मानसखंड मंदिर माला मिशन के लिए 25 करोड़ रुपये और शारदा कॉरिडोर के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। यह परियोजनाएं विशेष रूप से कुमाऊं क्षेत्र में धार्मिक स्थलों के समुचित विकास पर केंद्रित हैं। साथ ही, ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग को बढ़ावा देने और हिमालयन संग्रहालय के लिए 2.64 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इससे पर्यटकों को एक ही स्थान पर प्रदेश के सभी धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों की विस्तृत जानकारी मिल सकेगी।

2027 में अर्द्धकुंभ के लिए बजट में प्रारंभिक तैयारियां शुरू

उत्तराखंड में 2027 में अर्द्धकुंभ का आयोजन होना है, जिसके लिए सरकार ने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस आयोजन की भव्यता और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए 10 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, कांवड़ मेले को भी आध्यात्मिक पर्यटन की दृष्टि से अधिक महत्व दिया जाएगा और इसके लिए 7 करोड़ रुपये की राशि रखी गई है।

नए पर्यटन स्थलों का विकास और टिहरी झील का विस्तार

पर्यटन को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए सरकार टिहरी झील के विकास पर 100 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके अलावा, नए पर्यटन स्थलों के विकास के लिए 10 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।

उत्तराखंड सरकार की इन योजनाओं से आध्यात्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी, जिससे श्रद्धालु और पर्यटक पूरे वर्ष यहां आ सकेंगे। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।

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