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अलविदा ‘टेक्सटाइल किंग’: रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का 87 वर्ष की आयु में निधन, साहसिक उड़ानों और विवादों से भरा रहा सफर

On: March 29, 2026 4:44 AM
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विजयपत सिंघानिया रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन का पोर्ट्रेट।

मुंबई: भारतीय कॉर्पोरेट जगत के एक युग का अंत हो गया है। देश के प्रतिष्ठित ‘रेमंड ग्रुप’ (Raymond Group) को फर्श से अर्श तक पहुँचाने वाले दिग्गज उद्योगपति और पूर्व चेयरमैन डॉ. विजयपत सिंघानिया का शनिवार शाम मुंबई में निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से न केवल व्यापार जगत, बल्कि एविएशन और खेल जगत में भी शोक की लहर दौड़ गई है।

बेटे गौतम सिंघानिया ने दी जानकारी

विजयपत सिंघानिया के निधन की आधिकारिक पुष्टि उनके बेटे और रेमंड ग्रुप के वर्तमान एमडी गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर की। उन्होंने एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा:

“गहरे दुख के साथ हम पद्म भूषण डॉ. विजयपत कैलाशपत सिंघानिया के निधन की जानकारी दे रहे हैं। वे एक दूरदर्शी नेता, परोपकारी और प्रेरणादायक व्यक्तित्व थे। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा दिशा दिखाती रहेगी।”

परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, उन्होंने शनिवार देर शाम अपने निवास स्थान पर शांतिपूर्वक अंतिम सांस ली।

आज होगा अंतिम संस्कार: उमड़ेगा दिग्गजों का हुजूम
कंपनी के प्रवक्ता द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, रविवार (29 मार्च) को मुंबई में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। कार्यक्रम की रूपरेखा कुछ इस प्रकार है:

  • श्रद्धांजलि सभा: दोपहर 1:30 बजे, हावेली (एलडी रुपारेल मार्ग) पर। यहाँ परिवार, मित्र और व्यापारिक जगत की हस्तियां उन्हें अंतिम विदाई देंगे।
  • अंतिम संस्कार: दोपहर 3:00 बजे, मुंबई के ऐतिहासिक चंदनवाड़ी श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार संपन्न होगा।

शून्य से शिखर तक: टेक्सटाइल इंडस्ट्री के ‘भीष्म पितामह’

1938 में जन्मे विजयपत सिंघानिया ने भारतीय व्यापार के इतिहास में अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने 1980 के दशक में रेमंड ग्रुप की कमान संभाली और अगले दो दशकों (2000 तक) में कंपनी को भारत के घर-घर का नाम बना दिया। ‘द कंप्लीट मैन’ (The Complete Man) के स्लोगन के साथ उन्होंने रेमंड को सिर्फ एक कपड़ा ब्रांड नहीं, बल्कि एक लाइफस्टाइल और प्रतिष्ठा का प्रतीक बना दिया।

उनके नेतृत्व में रेमंड ने न केवल सूटिंग्स के बाजार में एकाधिकार जमाया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी भारतीय कपड़ों का डंका बजाया। उन्होंने टेक्सटाइल के साथ-साथ इंजीनियरिंग और एविएशन जैसे क्षेत्रों में भी समूह का विस्तार किया।

हवाओं से था गहरा नाता: वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर एविएटर

विजयपत सिंघानिया सिर्फ एक बिजनेसमैन नहीं थे, बल्कि उनके भीतर एक एडवेंचरर (साहसी यात्री) भी बसता था। उन्हें आसमान की ऊंचाइयों से बेहद लगाव था। उनके नाम कई ऐसे रिकॉर्ड हैं जिन्हें तोड़ना आज भी मुश्किल है:

  • हॉट एयर बैलून रिकॉर्ड: उन्होंने हॉट एयर बैलून के जरिए सबसे ज्यादा ऊंचाई (करीब 69,000 फीट) तक पहुंचने का विश्व रिकॉर्ड बनाया था।
  • माइक्रोलाइट उड़ान: 1988 में उन्होंने लंदन से दिल्ली तक 23 दिनों की साहसिक माइक्रोलाइट विमान यात्रा की थी, जिसने दुनिया को हैरान कर दिया था।
  • वायुसेना का सम्मान: उनकी इस प्रतिभा को देखते हुए भारतीय वायुसेना ने उन्हें 1994 में मानद एयर कमोडोर की उपाधि से नवाजा था।

सम्मान और पुरस्कार

भारत सरकार ने राष्ट्र के प्रति उनके योगदान और उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए उन्हें 2006 में ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया था। इसके अतिरिक्त, साहसिक कार्यों के लिए उन्हें 2001 में ‘टेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड’ भी दिया गया। वे 2006 में मुंबई के शेरिफ (Sheriff of Mumbai) के मानद पद पर भी रहे।

सफलता की चमक और पारिवारिक विवादों का साया

विजयपत सिंघानिया का जीवन जितना शानदार रहा, उसका अंतिम पड़ाव उतना ही उतार-चढ़ाव भरा रहा। साल 2015 में उन्होंने अपनी पूरी 37% हिस्सेदारी (जो उस वक्त करोड़ों में थी) अपने बेटे गौतम सिंघानिया को सौंप दी थी। इसके कुछ समय बाद ही पिता और पुत्र के बीच संपत्ति और अधिकारों को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई।

मीडिया में उनके बयानों ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं, जहाँ उन्होंने बेटे पर उन्हें घर से बाहर निकालने और उपेक्षित करने के गंभीर आरोप लगाए थे। हाल के वर्षों में पिता-पुत्र के बीच तल्खी कम होने की खबरें भी आईं, लेकिन यह विवाद भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे चर्चित उत्तराधिकार विवादों में से एक रहा।

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एक युग का अंत

विजयपत सिंघानिया के जाने से भारतीय उद्योग जगत ने एक ऐसा चेहरा खो दिया है, जिसने न केवल व्यापार करना सिखाया, बल्कि यह भी दिखाया कि सपनों की कोई उम्र और सीमा नहीं होती। उनकी कमी को पूरा करना मुश्किल होगा, लेकिन उनकी विरासत उनके द्वारा बनाए गए ‘रेमंड’ साम्राज्य और उनकी साहसिक कहानियों के रूप में हमेशा जीवित रहेगी।

देश के प्रमुख राजनेताओं और उद्योगपतियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और उन्हें एक ‘सच्चा दूरदर्शी’ करार दिया है।
विजयपत सिंघानिया (1938 – 2026): एक महान व्यक्तित्व को विनम्र श्रद्धांजलि।

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